कसौली जाएं तो
हनुमान जी के सिद्ध मंदिर में दर्शन अवश्य करें
अभी कुछ समय पूर्व रम्य वादियों से घिरे खूबसूरत पहाड़ी स्थल-
कसौली जाने का अवसर मिला। चंडीगढ़-शिमला राजमार्ग पर स्थित कसौली चंडीगढ़ से -करीब
70-75 किलोमीटर दूर है और सोलन जिले के अंतर्गत आता है। एक कार्यालय का निरीक्षण
करने के सिलसिले में यहाँ पहुंचा तो मौसम बेहद शानदार और खुशगवार था और बादलों की
घनी घटाओं ने हमें अपने घेरे में ले लिया था। बादल के टुकड़े बदन को छू-छूकर निकल
रहे थे। दूर कहीं एक गीत बज रहा था-ये कौन आया, रोशन हो गई महफिल जिसके नाम से।
क्या इसीलिए ये हमें छू-छू कर देख रहे थे? ये कल्पना भी अद्भुत है।
यहाँ के एयरफोर्स स्टेशन के अंतर्गत आने वाले क्षेत्र का सबसे
बड़ा आकर्षण है-हनुमान जी का सिद्ध मंदिर। जहाँ यह मंदिर स्थित है उसे Manky Point कहा जाता है। संभव है तमाम बंदरों के
वहाँ होने के कारण इसका नाम मंकी पॉइंट पड़ा हो और अंग्रेजी में इसे बिगाड़ कर ऐसा
कहा जाने लगा हो। हनुमान जी का मंदिर हो और बंदर न हों,ऐसा तो हो ही नहीं सकता। यहाँ
तक जाने के लिए लगभग एक हजार सीढ़ियाँ घूम घूम कर चढ़नी पड़ती हैं। तब जाकर मंदिर
की दीवारें आरंभ होती हैं और मंदिर के अहाते में बना हेलीपेड नज़र आता है।
बुजुर्गों के लिए यह चढ़ाई आसान नहीं है।
इस स्थान के बारे में मान्यता है कि संजीवनी बूटी लाते समय
हनुमान जी का पाँव दो स्थानों पर पहाड़ियों से टकराया। दायां पाँव जहाँ टकराया, वह स्थान शिमला
का जाखू है और बायां पाँव जहाँ टकराया, वह कसौली का यही स्थान है। पाँव के आकार की
चोटी पर ही यह मंदिर बना हुआ है। मंदिर की ऊँचाई लगभग 7220 फुट है। मंदिर में "लाल
देह लाली लसे" वाले हनुमान जी नहीं हैं बल्कि चमचमाते सफेद संगमरमर की
दिव्य मूर्ति है जिसका आकर्षण इतना ज्यादा है कि बस आदमी उन्हें निहारता ही रह
जाए। साथ में दुर्गा माँ हैं, भगवान भोले हैं, गणेश जी हैं और भगवान विष्णु भी। बजरंगी
के दर्शन ने तन-मन की सारी थकान दूर कर दी। हनुमान जी के दर्शन करते-करते नज़र ऊपर
को उठी तो देखा कि कपीश्वर के जन्म के बारे में बड़ा बढ़िया श्लोक भी लिखा है।
मैंने उसे नोट कर लिया। ये श्लोक इस प्रकार है-
श्रीकृष्ण चतुर्दश्यां भौमे स्वात्यां कपीश्वर।
मेषलग्ने अंजनीगर्भात् प्रादूर्भूत स्वय: शिव।। ("अगस्त्य संहिता")
(अर्थात मंगलवार श्रीकृष्ण
चतुर्दशी के दिन मेष लग्न के साथ अंजनी माता के गर्भ से हनुमान जी के रूप में
स्वयं भगवान शिव उत्पन्न हुए)
चूंकि यह स्थान सामरिक रक्षा की दृष्टि
से बहुत महत्वपूर्ण है, इसलिए किसी भी स्थान की फोटो लेना निषिद्ध ही नहीं है, आप
यहाँ कैमरा तो छोड़िए, पेनड्राइव
तक नहीं ले जा सकते। इसलिए प्रभु की कोई फोटो तो नहीं ले सका पर कसौली के कुछ
चित्र जरूर साथ लाया हूँ।
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