राष्ट्रीय जनसंख्या
विज्ञान संस्थान- आईआईपीएस, मुंबई में 17
से 19 फरवरी, 2016 को आयोजित पाँचवा
राजभाषा सम्मेलन
पिछले
कुछ वर्षों से स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा राजभाषा सम्मेलन आयोजित कराए जा रहे हैं ताकि देशभर
में स्थित अपने सम्बद्ध एवं अधीनस्थ कार्यालयों में राजभाषा हिंदी का कामकाज
बढ़ाने और अधिकारियों एवं कर्मचारियों को अपना ज्यादा से ज्यादा काम हिंदी में करने हेतु प्रोत्साहित किया जा सके। इस प्रकार के
सम्मेलन बारी-बारी से देश भर में मंत्रालय के अधीनस्थ आने वाले कार्यालयों में
आयोजत किए जा रहे हैं। शायद इस प्रकार का निर्णय लेने वाला हमारा मंत्रालय देश का
पहला मंत्रालय है।
राजभाषा सम्मेलनों की शुरुआत
इस श्रृंखला की शुरुआत वर्ष 2012 में निम्हांस, बंगलौर (कर्नाटक) से हुई जब मंत्रालय की निगरानी में पहला दो दिवसीय
राजभाषा सम्मेलन बंगलौर स्थित राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य विज्ञान संस्थान में
26-27 दिसंबर, 2012 को आयोजित किया गया। सम्मेलन बेहद सफल
रहा। दूसरा राजभाषा सम्मेलन 22-23 फरवरी, 2013 को भारतीय
पाश्चर संस्थान, कुन्नूर (तमिलनाडु) में आयोजित किया गया। ‘ग’ क्षेत्र में आयोजित यह
सम्मेलन भी बहुत अधिक सफल रहा। मेरे लिए सर्वाधिक
सम्मान की बात यह थी कि इन दोनों सम्मेलनों के दौरान न केवल मेरे दो व्याख्यान रखे
गए थे बल्कि संपूर्ण मंच संचालन मैंने ही किया और उससे भी अधिक गर्व की बात यह थी
कि संचालन को व्याख्यानों से ज्यादा पसंद किया गया।
तीसरा सम्मेलन अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, नई दिल्ली में 12-12 फरवरी, 2014 को और चौथा सम्मेलन,
एचएलएल, तिरुवनंतपुरम में 29-30 दिसंबर,
2014 को आयोजित किया गया। इन सम्मेलनों के संचालन गौरव भी मुझे ही
प्राप्त हुआ। दो विषयों पर मेरे दो व्याख्यान भी प्रतिभागियों के बीच काफी चर्चा
का विषय रहे। इसी श्रृंखला का पाँचवां राजभाषा सम्मेलन इसी वर्ष 17 से 19 फरवरी,
2016 में राष्ट्रीय जनसंख्या विज्ञान संस्थान, मुंबई में आयोजित किया गया।
दीप प्रज्ज्वलन से सम्मेलन का शुभारंभ
इस सम्मेलन का आरंभ होमी भाभा शिक्षण संस्थान के ऑडिटोरियम में
दीप-प्रज्ज्वलन से हुआ। कार्यक्रम के अध्यक्ष राष्ट्रीय जनसंख्या
विज्ञान संस्थान- आईआईपीएस, मुंबई के निदेशक श्री एफ.राम ने दीप जलाकर
सम्मेलन का शुभारंभ किया।
राष्ट्रीय जनसंख्या विज्ञान संस्थान- आईआईपीएस, मुंबई में 17 से 19 फरवरी, 2016 को आयोजित पाँचवा राजभाषा सम्मेलन
पिछले
कुछ वर्षों से स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा राजभाषा सम्मेलन आयोजित कराए जा रहे हैं ताकि देशभर
में स्थित अपने सम्बद्ध एवं अधीनस्थ कार्यालयों में राजभाषा हिंदी का कामकाज
बढ़ाने और अधिकारियों एवं कर्मचारियों को अपना ज्यादा से ज्यादा काम हिंदी में करने हेतु प्रोत्साहित किया जा सके। इस प्रकार के
सम्मेलन बारी-बारी से देश भर में मंत्रालय के अधीनस्थ आने वाले कार्यालयों में
आयोजत किए जा रहे हैं। शायद इस प्रकार का निर्णय लेने वाला हमारा मंत्रालय देश का
पहला मंत्रालय है।
राजभाषा सम्मेलनों की शुरुआत
इस श्रृंखला की शुरुआत वर्ष 2012 में निम्हांस, बंगलौर (कर्नाटक) से हुई जब मंत्रालय की निगरानी में पहला दो दिवसीय
राजभाषा सम्मेलन बंगलौर स्थित राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य विज्ञान संस्थान में
26-27 दिसंबर, 2012 को आयोजित किया गया। सम्मेलन बेहद सफल
रहा। दूसरा राजभाषा सम्मेलन 22-23 फरवरी, 2013 को भारतीय
पाश्चर संस्थान, कुन्नूर (तमिलनाडु) में आयोजित किया गया। ‘ग’ क्षेत्र में आयोजित यह
सम्मेलन भी बहुत अधिक सफल रहा। मेरे लिए सर्वाधिक
सम्मान की बात यह थी कि इन दोनों सम्मेलनों के दौरान न केवल मेरे दो व्याख्यान रखे
गए थे बल्कि संपूर्ण मंच संचालन मैंने ही किया और उससे भी अधिक गर्व की बात यह थी
कि संचालन को व्याख्यानों से ज्यादा पसंद किया गया।
तीसरा सम्मेलन अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, नई दिल्ली में 12-12 फरवरी, 2014 को और चौथा सम्मेलन,
एचएलएल, तिरुवनंतपुरम में 29-30 दिसंबर,
2014 को आयोजित किया गया। इन सम्मेलनों के संचालन गौरव भी मुझे ही
प्राप्त हुआ। दो विषयों पर मेरे दो व्याख्यान भी प्रतिभागियों के बीच काफी चर्चा
का विषय रहे। इसी श्रृंखला का पाँचवां राजभाषा सम्मेलन इसी वर्ष 17 से 19 फरवरी,
2016 में राष्ट्रीय जनसंख्या विज्ञान संस्थान, मुंबई में आयोजित किया गया।
दीप प्रज्ज्वलन से सम्मेलन का शुभारंभ
इस सम्मेलन का आरंभ होमी भाभा शिक्षण संस्थान के ऑडिटोरियम में
दीप-प्रज्ज्वलन से हुआ। कार्यक्रम के अध्यक्ष राष्ट्रीय जनसंख्या
विज्ञान संस्थान- आईआईपीएस, मुंबई के निदेशक श्री एफ.राम ने दीप जलाकर
सम्मेलन का शुभारंभ किया।
| (दीप प्रज्ज्वलित करते श्री एफ.राम, निदेशक, आईआईपीएस) |
उनके साथ मंच पर मौजूद
थे-स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के उप-निदेशक (रा.भा.) श्री चरण सिंह और
सहायक निदेशक (रा.भा.) श्री राजेश श्रीवास्तव यानि मैं स्वयं। कार्यक्रम के मुख्य
अतिथि थे-मुंबई विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के अध्यक्ष और प्रोफेसर डॉ. करूणाशंकर उपाध्याय।
| बायें से श्री चरण सिंह, श्री एफ. राम और राजेश श्रीवास्तव |
इस सम्मेलन के मुख्य अतिथि और प्रमुख व्याख्याता थे-प्रोफेसर डॉ. करूणाशंकर उपाध्याय जिन्होंने -“राजभाषा हिंदी का वैश्विक स्वरूप” विषय पर गहन
और सार्थक जानकारी प्रदान की। “हिन्दी के प्रचार-प्रसार
में मराठी विद्वानों का योगदान तथा हिन्दी एवं मराठी का तुलनात्मक अध्ययन” विषय पर यूनियन बैंक की मुख्य प्रबंधक (रा.भा.) श्रीमती सुलभा कोरे ने
अपने विचार व्यक्ति किए। “हिन्दी वर्तनी का मानकीकरण और
व्याकरण संबंधी अशुद्धियां” विषय के वक्ता थे मुंबई
स्थित राजभाषा कार्यान्वयन कार्यालय के सहायक निदेशक डॉक्टर अनंत श्रीमाली। अपने
रोचक और सहज सुबोध अंदाज में डॉक्टर श्रीमाली ने प्रतिभागियों को हिंदी वर्तनी
यानी स्पैलिंग के मानकीकरण के बारे में और व्याकरण संबंधी सामान्य अशुद्धियों के
बारे में बताया। मेरे दो व्याख्यान थे, पहला- "सॉफ्टवेयर की दुनिया में हिन्दी के बढ़ते चरण-यूनिकोड के माध्यम से
कंप्यूटर पर हिन्दी में कार्य करना" और दूसरा
-“सहज सरल अनुवाद की बारीकियां” । ये दोनों ही व्याख्यान पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से प्रस्तुत
किए गए। इस सम्मेलन के सारे ही व्याख्यान बेहद पसंद किए गए।
समापन समारोह
19 फरवरी का
आखिरी सत्र वस्तुतः समापन समारोह था जिसकी अध्यक्षता निदेशक एवं वरिष्ठ प्रोफेसर,
अंतर्राष्ट्रीय जनसंख्या विज्ञान संस्थान, मुंबई
श्री एफ.राम ने की। निदेशक महोदय ने मंत्रालय की निगरानी में आयोजित इस कार्यक्रम
की प्रशंसा की और उसकी सफलता पर बधाई दी। उन्होंने मंत्रालय के अधिकारियों सहित
सभी उपस्थिति जनसमूह का आभार प्रकट किया और आशा व्यक्त की कि वे इस सम्मेलन से
जरुर कोई अच्छी सीख अपने साथ ले जा रहे होंगे।
समापन समारोह
19 फरवरी का
आखिरी सत्र वस्तुतः समापन समारोह था जिसकी अध्यक्षता निदेशक एवं वरिष्ठ प्रोफेसर,
अंतर्राष्ट्रीय जनसंख्या विज्ञान संस्थान, मुंबई
श्री एफ.राम ने की। निदेशक महोदय ने मंत्रालय की निगरानी में आयोजित इस कार्यक्रम
की प्रशंसा की और उसकी सफलता पर बधाई दी। उन्होंने मंत्रालय के अधिकारियों सहित
सभी उपस्थिति जनसमूह का आभार प्रकट किया और आशा व्यक्त की कि वे इस सम्मेलन से
जरुर कोई अच्छी सीख अपने साथ ले जा रहे होंगे।
| सम्मेलन में देश भर से पधारे प्रतिनिधि |
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