दिल तक नहीं जातीं
जो सदाएं दिल तक नहीं जातीं
वो कभी मंजिल तक
नहीं जातीं।
देख आई हैं जो सागर
गहरा
लहरें वो साहिल तक नहीं जातीं।
लोग मिलते हैं
हाथ मिलते हैं
बात लेकिन दिल तक नहीं जाती।
उम्रभर रहता फिर
यकीं तेरा
बातें जो महफिल तक नहीं जातीं।
शायद नहीं है
तड़प वो इनमें,
अब सदाएं दिल तक नहीं जातीं।
दर्द दिखलाता नहीं हूँ
बन गई है आदत ही ऐसी दर्द दिखलाता
नहीं हूँ
मुहब्बत तो बहुत करता हूँ मैं, पर
जताता नहीं हूँ।
कभी दिल पे लगे तो जी भरके रो लेना
बेहतर है
छुपाने को दर्द अपना जबरन मुस्कुराता
नहीं हूँ।
सुना है ये दर्द में दिल को बहुत
चैन सुकून देती
नशा तुझ-सा न हो बोतल में,तो मुँह
लगाता नहीं हूँ।
सजाकर मैं रखूंगा पलकों पर तुझे
जीवनभर मगर
गिराकर
दूसरों को अगर गिरे मैं तब उठाता नहीं हूँ।
आदमी थक गया
जिंदगी भर आदमी चलकर इतना थक गया
गैरों के कंधे पर तभी श्मशान तक गया।
दम निकलते ही पराए हो गए हैं सभी
रस्सियों से बाँधा किसी ने कोई मुँह ढक गया।
ओढ़ कर क़फ़न सिर्फ यही कहता है आदमी
सो लेने दो चैन से अब मैं बहुत थक गया।
एक न एक दिनतो टपकना ही होता है इसे
ये बुढ़ापा ऐसा फल है जो खूब पक गया।
कानों तक आवाज उनके जाती क्यों नहीं
बाप बूढ़ा रातभर खाँसकर थक थक गया ।
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